Latest Article...Show More >>

Tuesday, March 22, 2016

Happy Holi 2016 Romantic Whatsapp BBM Status

Happy Holi 2016 Romantic Whatsapp BBM Status

Happy Holi 2016 Romantic Whatsapp BBM Status:- Holi festival is very famous festival of Hindus. Its a festival of colours and joys. Here we are going to share Happy Holi 2016 Romantic Whatsapp BBM Status . Wish to your friends by sending these Cute Romantic Status For PC Laptops also share on their mobile phones, whatsapp messages, tablet, facebook inbox. with your friends, wife, husband, relatives, brothers, kids, sisters, bestfriends, school college friends, boyfriend, girlfriend and others.

Happy Holi 2016 Romantic Whatsapp BBM Status


Dipped in hues of love and trust has come the festival of Holi.

Let the colors of Holi spread the message of peace and happiness.

Holi is the day to express love with colors. It is a time to show affection. All the colors that are on you are of love!

Holi is a special time of year to remember those who are close to our hearts with splashing colors!

If you liked this article Happy Holi 2016 Romantic Whatsapp BBM Status. Then share on Facebook,Whatsapp, Wechat, BBM Messengers, Twitters, Google Plus, Pinterest and all other social networking sites. Hope that you like Holi 2016 BBM Status.

Happy Holi 2016 Essay in Hindi

Holi is one of the best and colourful festival of India. Holi will be celebrated on 6th of March 2014. It is celebrated in all over the India irrespective of age and religion. On this occasion people uses to wish happy holi to their friends and relatives with Holi SMS Messages Quotes Greetings Wallpapers.

Here are the Happy Holi 2016 Essays in Hindi which are used to write in Essay competitions on the eve of Holi

Essay On Holi 2016 In Hindi



प्रस्तावना - होली हिन्दुओं का एक प्रमुख धार्मिक त्यौहार है जो कि बसंत ऋतु में मनाया जाता हैं! यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता हैं ! यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहां भी धूम धाम के साथ मनाया जाता हैं जिनमें बांगला देश, पाकिस्तान तथा कुछ अन्य लोगों द्वारा जो की हिन्दू संस्कृति का अनुकरण करते हैं वहां भी मनाया जाता हैं जिसमे सूरीनाम, मलेशिया, दक्षिणी अफ्रीका, त्रिनिदाड और टोबाको, यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट, मर्तिओउस, और फ़िजी मुख्य हैं !


महत्त्व - होली के त्यौहार से जुडी हुई कई प्राचीन कहानियाँ जुड़ी हुई हैं कि कैसे यह त्यौहार प्रारंभ हुआ तथा कैसे और किस तरह से इसकी लोकप्रियता भारतवर्ष में ही नहीं अपितु अन्य देशों में भी विख्यात हुई!


वैष्णव धर्म के अनुसार - वैष्णवों के अनुसार प्राचीन काल में हिरन्यकशिपु नाम से एक महान राक्षस राजा हुआ करता था ! जिसने अपने तपो बल से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर उनसे यह वरदान माँगा था कि उसे मारना बिलकुल ही संभव न था!

उसने कठिन तपस्या द्वारा ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर उनसे यह वरदान माँगा कि वो जब मरे तब न तो दिन हो न रात हो, न तो घर में हो न तो घर के बाहर, न तो पृथ्वी पर हो न आकाश पर हो, न ही मनुष्य द्वारा हो न ही पशु द्वारा, न ही अस्त्र द्वारा हो न ही शशस्त्र द्वारा, !

इस वरदान को पाने के बाद वह अहंकारी हो गया और उसने स्वर्ग तथा पृथ्वी पर आक्रमण कर दोनों ही लोको में विजय प्राप्त कर उसने लोगों की भगवान् की पूजा करने पर भी निषेध लगानी शुरू कर दी! ऋशियों मुनियों के हवन यज्ञ आदि प्रतिबंधित कर दिए गए और लोगों को कहा की सब उसकी पूजा करे और उसे प्रसन्न करे !


इस मान्यता के अनुसार हिरन्यकशिपू का पुत्र प्रहलाद खुद ही भगवान् विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था ! हिरन्यकशिपू के कई धमकियों के बाद भी प्रहलाद ने भगवान् विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी और निरंतर वह भगवान विष्णु की पूजा आराधना में ही लीन रहता था !

हिरन्यकशिपू ने उसे मारने के लिए जहर दिया तो उसको खाने के बाद भी जहर का असर प्रहलाद पर कुछ भी नहीं हुआ ! मानो वह जहर मुख में जाते ही अमृत बन गया !
प्रहलाद को हाथी के पैरों के नीचे डाल कर कुचलने की कोशिश भी नाकाम हुई इससे भी उसे कुछ हानि नहीं पहुंची !
उसे भूखे और बड़े जहरीले साँपों के साथ डाला गया पर फिर भी वह जीवित बच गया !

तब उसने प्रहलाद को जलती हुई चिता पर बैठाने की आज्ञा दी !

तब हिरन्यकशिपू की बहन जिसका नाम होलिका था, उसने कहा की में प्रहलाद को ले कर चिता में बैठ जाती हूँ, क्यूंकि होलिका को भगवान् से वर प्राप्त था ! भगवान् ने उसे वरदान में एक ऐसा वस्त्र प्रदान किया था जिसे ओढ़ कर वह आग में प्रवेश करने पर भी आग की लपटों से सुरक्षित रहती और कभी भी नहीं जलती !

उसने वह वस्त्र ओढ़ कर चिता में प्रवेश किया तथा बालक प्रहलाद को अपनी गोद में बिठा लिया !
चिता में अग्नि प्रज्वलित की गई , पर अग्नि की भयंकरलपटों में भगवान् की कृपा से वह वस्त्र होलिका के शरीर से उड़ कर प्रहलाद पर लिपट गई !
और उस चिता में आग की लपटों से होलिका जल कर मर गई पर प्रहलाद को कोई नुक्सान नहीं पंहुचा !
तभी से हिंदुओं में यह दिन होलिका दिवस के रूप में मनाया जाता है!
होलिका की मूर्ति को ऐसे धातुओं से बना कर तैयार करते हैं कि वह अग्नि में जल जाये, तथा बालक प्रहलाद को पत्थर से तरास कर बनाते हैं की वह कभी न जले !
इस प्रकार यह होलिका भारतवर्ष में जगह 2 पर जलाई जाती है !


होली से सम्बंधित अन्य महत्वपूर्ण कहानिया !

कृष्ण और राधा की कहानी - होली का त्यौहार भगवान् कृष्ण और राधा के प्रेम और रास लीलाओं का एक अभिन्न अंग माना जाता हैं ! इस सम्बन्ध में पुरातत्व प्रवक्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार, कृष्ण जी का रंग श्याम वर्ण था तथा राधा बहुत ही स्वेत वर्ण की थी, जिसके कारण राधा और कृष्ण में हमेशा टकरार होती रहती थी ! राधा जी, कृष्ण जी को साँवले सलोने आदि नामों से पुकार कर हमेशा उन्हें चिढ़ाया करती थी !
एक दिन इसी बात पर चिढ़ कर कृष्ण जी ने, राधा जी के चेहरे पर बहुत सारा रंग हाथों में ले कर लगा दिया, फिर क्या था राधा और उनकी अन्य सखियाँ भी रंग लेकर कृष्ण जी पर फेकने लगे, कृष्ण के सखा भी साथ में आके कृष्ण जी के साथ तथा गोपिकाये राधा जी के साथ यह एकदूसरे पर रंग फेकने लगे ! वृन्दावन में बंसत के ऋतू में उस दिन यह सारी प्रक्रिया शुरू हुई तो उसी दिन से यह दिन प्रेम, विश्वास और भक्ति के त्यौहार के नाम से सारे भारतवर्ष में मनाया जा रहा हैं !


शिव पार्वती और कामदेव की कहानी - इस कथा के अनुसार शिव अर्धांगिनी माँ सती ने जब अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में बिना आमन्त्रर के यज्ञ में भाग लिया तो दक्ष प्रजापति ने सती को, भगवान् शिव जी के लिए कठिन और कटु वचन सुनाए! माँ सती अपने पति के लिए दक्ष प्रजापति से इतने अपमानित और कटु वचन सुन न सकी ! एक पतिव्रता स्त्री के लिए अपने पति के बारे में ये सब सुनना भी असहनीय था! उन्होंने उसी समय तत्क्षण दक्ष प्रजापति के यज्ञ कुंड में ही अपने प्राणों की आहुति दे दी !

यह सब घटना जब भगवान् शंकर को मिली तो उन्होंने दक्ष प्रजापति के यज्ञ को विध्वंस कर दिया और दक्ष प्रजापति का सर धर से अलग कर दिया !
पर सांसारिक कर्मों को सुचारू रूप से चलाने के लिए दक्ष प्रजापति का जीवित होना परम आवश्यक था तब सभी देवताओं ने मिलकर शिव जी की स्तुति की और उनसे प्रार्थना की कि वे दक्ष प्रजापति को माफ़ कर दे, उसने अहंकार वश आकर ये कृत्य किया अब उसे जीवित कर उसे अपनी भूल सुधारने का अवसर प्रदान करे !

भगवान् शिव जी ने दक्ष प्रजापति को माफ़ कर उसके शरीर को एक बकड़े के धर से जोड़ कर उसे जीवन दान दिया !
पर सती के वियोग में भगवान् शिव बहुत ही दुखी हो तप साधना में लीन हो गए ! उन्होंने संसार से ही मुख मोड़ लिया !

दूसरी ओर माँ सती ने पार्वती के रूप में राजा हिमालय के घर जन्म लिया ! पार्वती चाहती थी कि उनका विवाह भगवान् शिव से हो जिसके लिया उन्होंने कठिन तपस्या प्रारंभ की हज़ारों सालों की तपस्या के बाद भी वो भगवान् शिव के तप को न तो भंग कर सकी अपितु भगवन शिव प्रसन्न ही हुए !

तब भगवान् विष्णु ने कामदेव को पार्वती जी की सहायता के लिए भेजा, और कामदेव ने बसंत ऋतू के आगमन पर शिव जी के ऊपर पुष्प बाण चलाया जिससे भगवान् शिव जी की तपस्या भंग हो गई, पर भगवान् शिव ने अपनी तपस्या भंग करने के लिए कामदेव को तत्क्षण तीसरी आँख खोल कर भस्म कर दिया! पर जब शिव जी ने पार्वती जी को देखा तो उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया !
इस आधार पर होली की आग में वासनात्मक आग की आहुति देकर सच्चे प्रेम की विजय के रूप में आज भी होली का पर्व मनाया जाता हैं !

रति और कामदेव की कहानी - इस कथा के अनुसार के अनुसार रति जो की कामदेव की पत्नी थी, कामदेव के भस्म हो जाने पर विलाप करने लगी! वह भगवान् शिव से अपने पति के पुनर जीवन के लिए प्रार्थना करने लगी ! वह भगवान् शिव को मनाने में लग गई की कामदेव ने जो भी किया वह भगवान् विष्णु के कहने पर लोक कल्याण के किया! तब सभी रति तथा भगवान् विष्णु, ब्रह्मा जी आदि देवों के परम आग्रह पर उन्होंने कामदेव को पुनर्जीवित कर जीवन प्रदान किया!
अतः कामदेव के पुनर्जीवित होने पर यह दिन बहुत ही हर्षों उल्लास के साथ होली के रूप में विख्यात हुआ !


कृष्ण, कंस और पूतना की कहानी - मथुरा में कंस नामक एक राजा था जो ऋषि मुनियों आदि पर बहुत ही अत्याचार करता था ! कंस की एक बहन थी जिसका नाम देवकी था, देवकी का विवाह कंस ने धूम धाम के साथ वासुदेव से किया पर जब वासुदेव देवकी को लेकर अपने राज्य विदा हो रहा था तो उस समय एक तेज आकाशवाणी हुई, की हे मूर्ख जिस बहन का विवाह तमने इतनी धूम धाम से किया हैं उसी बहन के गर्भ से उत्पन्न आठवें पुत्र द्वारा तेरा वध होगा!
यह भविष्यवाणी सुनकर कंस ने अपने जमता वासुदेव तथा बहन देवकी को कारागार में डलवा दिया कि जब तक उसके गर्भ से उत्पन्न आठवें पुत्र को मार नहीं दूँ तब ये दोनों यहीं कारागार में ही रहेंगे !
कारागार में जन्मे देवकी के सभी सातों पुत्रों को कंस ने कारागार में ही मार दिया ! पर जब आठवें पुत्र का जन्म हुआ तो कारागार में सभी सैनिक गहरी नीद में सो गए कारागार के दरवाजे खुल गए कारागार में भविष्यवाणी हुई कि हे वासुदेव अपने इस पुत्र को गोकुल में नन्द जी और यशोदा जी के घर पहुचा दो और उनकी पुत्री को जो की आज ही जन्मी हैं उसे अपने साथ यहाँ कारागार में ले आओ – वासुदेव ने ऐसा ही किया कृष्ण जी को नन्द जी को सौंप कर उनकी पुत्री को कारागार में ले आये !
कंस को जब पता चला कि देवकी की आठवीं संतान ने जन्म लिया हैं तो वह उसे मारने को कारागार में आया ! पर जैसे ही उस पुत्री को मारने को अपने हाथों में लिया वह अदृश्य हो बोलने लगी हे मुर्ख कंस – मैं तो एक पुत्री हूँ तुझे तो देवकी की आठवी संतान जो की पुत्र हैं उसके द्वारा तेरा वध निश्चित हैं – तू मुझे मारने की विफल चेष्टा कर रहा हैं वहां गोकुल में तेरा वध करने के लिए वह अवतरित हो चुका हैं !
यह सुनकर कंस काफी डर गया और उसने योजना बनाई कि गोकुल के में जन्में सभी नवजात शिशुओं की वह हत्या करवा देगा ! इसके लिए उसने पूतना नमक एक राक्षसी को गोकुल भेजा !

वह सुन्दर रूप धारण कर गोकुल की स्त्रियों के साथ घुलमिल जाती फिर स्तनपान के बहाने वह शिशुओं को विषपान द्वारा मार देती ! गोकुल के कई शिशु उसके विषपान का शिकार हुए !

एक दिन जब उसने नन्द जी के घर में प्रवेश किया तो कृष्ण जी को विषपान करवाना चाहा पर कृष्ण जी के दिव्य शक्ति के आगे उसकी एक न चली! और उसी दिन उन्होंने शिशु रूप में पूतना का वध कर दिया !

जब यह बात गोकुल वासियों को पता चली तो वे इस दिवस को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ होली के रूप में आज भी मानते हैं!


राक्षसी ढूंढी और अबोध शिशुओं की कहानी - प्राचीन काल में एक राजा थे जिनका नाम पृथु था ! उसी समय एक ढूंढी नमक एक राक्षसी उनके राज्य में आ गई थी जिसने कठोर ताप करके देवताओं से वरदान प्राप्त किया था कि उसे न मानव, देवता, राक्षस मार सके बल्कि ठंडी और गर्मी का भी उस पर कोई असर न हो! इस प्रकार का वरदान पाने के बाद वह अत्याचारी हो गई, वह अबोध शिशुओं को खा जाती थी ! उसके इस तरह के कृत्यों को देख रजा पृथु ने अपने राज पुरोहित को बुला कर उनसे इसका समाधान पूछा! तब राज पुरोहित ने बताया कि बसंत ऋतू पूर्णिमा के दिन में गाँव के सभी बालक मिलकर अपने 2 घरों से लकड़ियाँ लेकर निकले और एक जगह सभी लकड़ियों को इकठ्ठा कर जोर -2 से मंत्रोचारण करें प्रदिक्षना करें फिर लकड़ियों में आग लगाकर जोर 2 से चिल्लाये, शोरगुल करें, तालियाँ बजाएं गाना गाये एक साथ हसें इस प्रकार एकभाव में होकर एक साथ इकठ्ठा होकर करने से वह राक्षसी मर जाएगी!
पुरोहित के कहानुसार – राजा ने अपने राज्य में घोषणा करवा दी ! पूर्णिमा के दिन सभी बच्चों ने मिलकर ऐसा ही किया और भाच्चों के इस प्रकार के शरारत को वह राक्षसी सहन न कर सकी और वह भाग खड़ी हुई!
अतः यह होली का त्यौहार एकता के प्रतीक के रूप में भी मान्य हैं!

भगवान् शिव तथा शिव गणों की कहानी - एक और महत्त्वपूर्ण कथा शिव गणों से सम्बंधित हैं ! इस कथन के अनुसार शिव जी से पार्वती जी का विवाह फागुन मास के पूर्णिमा को हुआ था ! और उनके विवाह में शिव गणों ने जिनमे भूत, पिचाश, सर्प, पशु आदि थे जो भगवान् शिव के साथ उनके बारात में माँ पार्वती के घर जा रहे थे ! शिव पार्वती जी का विवाह इन सारे गणों की उपस्थिति में हुआ था जो कि बहुत ही अदभुत और अद्वितीय माना जाता है!
होली के दिन इस कथा के अनुसार लोग रंग आदि लगाकर शिव गणों का वेश धारण करते हैं और शिव और पार्वती जी के शुभ विवाह के लिए बाराती बन उनके विवाह को हर्षोल्लास के साथ मनाकर होली का पावन त्यौहार मानते हैं!

होली की परम्पराए तथा वर्णन - भारतवर्ष में हजारों की संख्या में लोग होली का त्यौहार मनाते हैं ! होली के त्यौहार की बहुत सी प्रमुख मान्यताये हैं! सबसे पहली तो यह त्यौहार बसंत ऋतु के आगमन तथा नये मौसम के साथ, अच्छी फ़सल और समृधि के लिए मनाया जाता हैं!
हिन्दू रंगों के साथ नए मौसम का आगमन और ठण्ड के मौसम को विदाई देते हैं!
यह त्यौहार अन्य कई पौराणिक कथाओं से भी जुडी हुई हैं ! यह बहुत ही धार्मिक और आनन्दमय त्योहारों में से एक हैं! होली के एक दिन पहले होलिका जलाई जाती हैं जबकि, होली के दिन रंग और गुलाल से लोग एक दूसरे को लगाकर एकता और प्रेम भाव जताते हैं!

रंगपंचमी - रंगपंचमी पूर्णिमा के पाचवें दिन मनाया जाता हैं जो कि रंगों से खेलने अथवा होली की समाप्ति का दिवस माना जाता हैं!

मुख्य होली दिवस - होली का मुख्य दिन जिसे संस्कृत में धूलि, धुल्हेती, धुलेंडी, धुल्वन्दना, और धुल्हंदी आदि नामों से भी जाना जाता हैं !

होलिका दिवस - होली के एक दिन पहले लोग आग जलाकर होलिका दहन करते हैं उसे होलिका दहन के नामसे तथा दक्षिण भारत में इस आग जलने की प्रक्रिया को काम दहन के नाम से मानते हैं!

छोटी होली - होलिका दहन के बाद दूसरे दिन, लोग इसी दिन से रंग खेलना प्रारंभ करते हैं जो कि रंगपंचमी दिवस तक मनाया जाता हैं!

”होली का त्यौहार कई जगहों पर दो दिन ही मनाते हैं जिसका मुख्य कारण सामाजिक नियमनिष्ठा के अतिरिक्त आयु, लिंग, कास्थ और सामाजिक प्रतिष्ठा में विभिन्नता मानी जा सकती हैं !
इन विभिन्नताओं के बावजूद भी आदमी हो या औरत, बूढ़ा हो या बच्चा सभी इस त्यौहार को आत्मीयता तथा पुरे प्रेम भाव से मानते हैं!
यह त्यौहार विनम्र भाव से नहीं बल्कि पूरे जोश और बहुत ही उत्साह से मनाया जाता हैं! ”

रतनावली में अंकित होली - जिसके अनुसार लोग एक दूसरे को रंग लगाने के साथ बास से बनी पिचकारियों में पानी में घुले हुए रंग भर कर एक दूसरे पर डालते थे !

आधुनिक होली - आधुनिक होली की उत्पत्ति का मुख्य श्रोत बंगाल के प्राचीन पद्धति को माना जाता हैं !
वैष्णव तंत्र के अनुसार बंगाल में गुरिया वैष्णव त्यौहार ही आधुनिक होली का प्राचीन रूप हैं! जिसमें लोग कृष्ण जी के मंदिर जाते थे और कृष्ण जी को लाल रंग लगा कर मालपुआ का भोग चढ़ते थे! उसके बाद ही वे दोस्तों और परिवार जनों के साथ रंग अबीर लगाकर होली खेलते और प्रसाद ग्रहण करते थे !
लाल रंग प्रेम का प्रतीक माना जाता हैं और कृष्ण जी को तृष्णा का महान राजा मानते हैं ! इसीलिए लाल रंग होली में बहुतायत से प्रयोग होता हैं!
होली का त्यौहार के मुख्य आकर्षण में लोग खुद की तृष्णा को भगवान् कृष्ण जी को समर्पित कर उन्हें प्राप्त करने की कोशिश करते हैं तथा समाज में एक अच्छे मनुष्य के रूप में जाने जाए इस का भी एक उदाहरण हैं!


Sunday, March 20, 2016

Rituals of Holi 2016

Rituals of Holi 2016

Days before the festival people start gathering wood for the lighting of the bonfire called Holika 2016 at the major crossroads of the city. This ensures that at the time of the actual celebration a huge pile of wood is collected.


Holika Dahan Celebrations

Then on the eve of Holi, Holika Dahan takes place. Effigy of Holika, the devil minded sister of demon King Hiranyakashyap is placed in the wood and burnt. For, Holika tried to kill Hiranyakashyap's son Prahlad, an ardent devotee of Lord Naarayana. The ritual symbolises the victory of good over evil and also the triumph of a true devotee.

Children also hurl abuses at Holika and pray pranks, as if they still try to chase away Dhundhi who once troubled little ones in the Kingdom of Prithu. Some people also take embers from the fire to their homes to rekindle their own domestic fires.

Play Of Colors

Next day, is of course the main day of Holi celebrations. The day is called Dhuleti
and it is on this day that the actual play of colours take place. There is no tradition of holding puja and is meant for pure enjoyment.
The tradition of playing colours is particularly rampant in north India and even in that region, there can be no comparison to the Holi of Mathura and Vrindavan. In Maharashtra and Gujarat too Holi is celebrated with lot of enthusiasm and fun.

People take extreme delight in spraying colour water on each other with pichkaris or pouring buckets and buckets of it. Singing Bollywood Holi numbers and dancing on the beat of dholak is also a part of the tradition. Amidst all this activity people relish gujiya, mathri, malpuas and other traditional Holi delicacies with great joy.

Drinks, specially thandai laced with bhang is also an intrinsic part of the Holi festivity. Bhang helps to further enhance the spirit of the occasion but if taken in excess it might dampen it also. So caution should be taken while consuming it.



Holi Celebrations In South India

In south India, however, people follow the tradition of worshiping Kaamadeva, the love god of Indian mythology. People have faith in the legend which speak about the great sacrifice of Kaamadeva when he shot his love arrow on Lord Shiva to break his meditation and evoke his interest in worldly affairs.

After, an eventful and funfilled day people become a little sober in the evening and greet friends and relatives by visiting them and exchange sweets. Holi special get togethers are also organised by various cultural organisations to generate harmony and brotherhood in the society.

Friday, March 18, 2016

Holika Dahan 2016

Holika Dahan 2016


Holika Dahan 2016 also Kamudu pyre is celebrated by burning Holika, the devil. For many traditions in Hinduism, Holi celebrates the death of Holika in order to save Prahlad, and thus Holi gets its name. In olden days, people use to contribute a piece of wood or two for Holika bonfire.
Holika Dahan

There was once a demon king by the name of Hiranyakashyap who won over the kingdom of earth. He was so egoistic that he commanded everybody in his kingdom to worship only him. But to his great disappointment, his son, Prahlad became an ardent devotee of Lord Naarayana and refused to worship his father.


Hiranyakashyap tried several ways to kill his son Prahlad but Lord Vishnu saved him every time. Finally, he asked his sister, Holika to enter a blazing fire with Prahlad in her lap. For, Hiranyakashyap knew that Holika had a boon, whereby, she could enter the fire unscathed.

Treacherously, Holika coaxed young Prahlad to sit in her lap and she herself took her seat in a blazing fire. The legend has it that Holika had to pay the price of her sinister desire by her life. Holika was not aware that the boon worked only when she entered the fire alone.
Prahlad, who kept chanting the name of Lord Naarayana all this while, came out unharmed, as the lord blessed him for his extreme devotion.
Thus, Holi derives its name from Holika. And, is celebrated as a festival of victory of good over evil.

Holi is also celebrated as the triumph of a devotee. As the legend depicts that anybody, howsoever strong, cannot harm a true devotee. And, those who dare torture a true devotee of god shall be reduced to ashes.

Holika Dahan

Even today, people enact the scene of 'Holika's burning to ashes' every year to mark the victory of good over evil.
In several states of India, specially in the north, effigies of Holika are burnt in the huge bonfires that are lit. There is even a practice of hurling cow dungs into the fire and shouting obscenities at it as if at Holika. Then everywhere one hears shouts of 'Holi-hai! Holi-hai!'.
The tradition of burning 'Holika' is religiously followed in Gujarat and Orissa also. Here, people render their gratitude to Agni, the god of fire by offering gram and stalks from the harvest with all humility.

Further, on the last day of Holi, people take a little fire from the bonfire to their homes. It is believed that by following this custom their homes will be rendered pure and their bodies will be free from disease.
At several places there is also a tradition of cleaning homes, removing all dirty articles from around the house and burning them. Disease-breeding bacteria are thereby destroyed and the sanitary condition of the locality is improved.

Thursday, March 17, 2016

Happy Holi 2016


History of Holi



Holi is an ancient festival of India and was originally known as 'Holika'. The festivals finds a detailed description in early religious works such as Jaimini's Purvamimamsa-Sutras and Kathaka-Grhya-Sutras. Historians also believe that Holi was celebrated by all Aryans but more so in the Eastern part of India.

Holi celebrations start with a Holika bonfire on the night before Holi where people gather, sing and dance. The next morning is a free-for-all carnival of colours, where participants play, chase and colour each other with dry powder and coloured water, with some carrying water guns and coloured water-filled balloons for their water fight. Anyone and everyone is fair game, friend or stranger, rich or poor, man or woman, children and elders. The frolic and fight with colours occurs in the open streets, open parks, outside temples and buildings. Groups carry drums and musical instruments, go from place to place, sing and dance. People move and visit family, friends and foes, first play with colours on each other, laugh and chit-chat, then share Holi delicacies, food and drinks. Some drinks are intoxicating. For example, Bhang, an intoxicating ingredient made from cannabis leaves, is mixed into drinks and sweets and consumed by many. In the evening, after sobering up, people dress up, visit friends and family.


It is said that Holi existed several centuries before Christ. However, the meaning of the festival is believed to have changed over the years. Earlier it was a special rite performed by married women for the happiness and well-being of their families and the full moon (Raka) was worshiped.

Calculating The Day Of Holi

There are two ways of reckoning a lunar month- 'purnimanta' and 'amanta'. In the former, the first day starts after the full moon; and in the latter, after the new moon. Though the amanta reckoning is more common now, the purnimanta was very much in vogue in the earlier days. According to this purnimanta reckoning, Phalguna purnima was the last day of the year and the new year heralding the Vasanta-ritu (with spring starting from next day). Thus the full moon festival of Holika gradually became a festival of merrymaking, announcing the commencement of the spring season. This perhaps explains the other names of this festival - Vasanta-Mahotsava and Kama-Mahotsava.

Reference In Ancient Texts And Inscriptions

Besides having a detailed description in the Vedas and Puranas such as Narad Purana and Bhavishya Purana, the festival of Holi finds a mention in Jaimini Mimansa. A stone incription belonging to 300 BC found at Ramgarh in the province of Vindhya has mention of Holikotsav on it. King Harsha, too has mentioned about holikotsav in his work Ratnavali that was written during the 7th century. The famous Muslim tourist - Ulbaruni too has mentioned about holikotsav in his historical memories. Other Muslim writers of that period have mentioned, that holikotsav were not only celebrated by the Hindus but also by the Muslims.

Reference In Ancient Paintings And Murals

History of HoliThe festival of Holi also finds a reference in the sculptures on walls of old temples. A 16th century panel sculpted in a temple at Hampi, capital of Vijayanagar, shows a joyous scene of Holi. The painting depicts a Prince and his Princess standing amidst maids waiting with syringes or pichkaris to drench the Royal couple in coloured water. A 16th century Ahmednagar painting is on the theme of Vasanta Ragini - spring song or music. It shows a royal couple sitting on a grand swing, while maidens are playing music and spraying colors with pichkaris. There are a lot of other paintings and murals in the temples of medieval India which provide a pictoral description of Holi. For instance, a Mewar painting (circa 1755) shows the Maharana with his courtiers. While the ruler is bestowing gifts on some people, a merry dance is on, and in the center is a tank filled with colored water. Also, a Bundi miniature shows a king seated on a tusker and from a balcony above some damsels are showering gulal (colored powders) on him.

Legends And Mythology

In some parts of India, specially in Bengal and Orissa, Holi Purnima is also celebrated as the birthday of Shri Chaitanya Mahaprabhu (A.D. 1486-1533). However, the literal meaning of the word 'Holi' is 'burning'. There are various legends to explain the meaning of this word, most prominent of all is the legend associated with demon king Hiranyakashyap. Hiranyakashyap wanted everybody in his kingdom to worship only him but to his great disappointment, his son, Prahlad became an ardent devotee of Lord Naarayana. Hiaranyakashyap commanded his sister, Holika to enter a blazing fire with Prahlad in her lap. Holika had a boon whereby she could enter fire without any damage on herself. However, she was not aware that the boon worked only when she enters the fire alone. As a result she paid a price for her sinister desires, while Prahlad was saved by the grace of the god for his extreme devotion. The festival, therefore, celebrates the victory of good over evil and also the triumph of devotion. Legend of Lord Krishna is also associated with play with colors as the Lord started the tradition of play with colours by applying colour on his beloved Radha and other gopis. Gradually, the play gained popularity with the people and became a tradition. There are also a few other legends associated with the festival - like the legend of Shiva and Kaamadeva and those of Ogress Dhundhi and Pootana. All depict triumph of good over evil - lending a philosophy to the festival.

Tuesday, March 15, 2016

Advance Happy Holi Wishes, Messages, SMS 2016 In English, Hindi

Advance Happy Holi Wishes, Messages, SMS 2016 In English, Hindi

On Holi people spay colors on others and Share their Wishes, messages to make this Holi celebration as best ever celebration in their life and memorial with colorful. People share their happiness, love and affection through Wishes, Messages, SMS in Facebook and Whatsapp. Most of them looking for best wishes to share each other. Finally we prepared an best wishes for 2016 Holi and listed below select on of them and share with every one to make great holi.



Advance Happy Holi Wishes, Messages, SMS 2016 In English


Dipped in hues of love and trust has come the festival of Holi.
Happy Holi!!

Bright colors, water balloons, lavish gujiyas and melodious songs are the ingredients of perfect Holi. Wish you a very happy and wonderful Holi.

May God gift you all the colors of life, colors of joy, colors of happiness, colors of friendship, colors of love and all other colors you want to paint in your life. Happy Holi.

If wishes come in rainbow colors then I would send the brightest one to say Happy Holi.

A true and caring relation doesn't have to speak loud, a soft sms is just enough to express the heartiest feelings. Enjoy the festival of Holi with lot of fun.

Best wishes to you for a Holi filled with sweet moments and memories to cherish for long.
Happy Holi!

Advance Happy Holi Wishes, Messages, SMS 2016 In Hindi


Khaa key gujiya, pee key bhaang,
laaga ke thoda thoda sa rang,
baja ke dholak aur mridang,
khele holi hum tere sang.
Holi Mubarak!
Rango mein ghuli ladki kya laal gulabi hai
Jo dekhta hai kehta hai kya maal gulabi hai
Pichle baras tune jo bhigoya tha holi mein
Ab tak nishani ka woh rumaal gulabi hai.

Chadenge jab pyare rang, ek meri dosti ka rang bhi chadhana.
Lagne lagenge tumhe suhane sare rang,
Aur meri dosti ka rang chamkega hurdum tumhare sang.
Bolo sarararara….
Wish you a very mastiful and colourful Happy Holi!

Apun wishing you a wonderful,
Super-duper,
Zabardast,
Xtra-badhiya,
Xtra special,
Ekdum mast and dhinchak,
Bole to ekdum jhakaas
“Happy Holi”.

Contact Form

Name

Email *

Message *

Happy Holi Wishes

Happy Holi Messages

Happy Holi Quotes

Happy Holi Poems

Happy Holi Shayari

Happy Holi Images